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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 284

नंबर 284किताब 2, नंबर 136
حَدَّثَنَا سَلَمَةُ بْنُ شَبِيبٍ، حَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ حُبَابٍ، عَنْ كَامِلٍ أَبِي الْعَلاَءِ، عَنْ حَبِيبِ بْنِ أَبِي ثَابِتٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَقُولُ بَيْنَ السَّجْدَتَيْنِ ‏ "‏ اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي وَارْحَمْنِي وَاجْبُرْنِي وَاهْدِنِي وَارْزُقْنِي ‏"‏ ‏.‏
Ibn Abbas narrated:"Between the two prostrations, the Prophet would say: (Allahummaghfir li, warhamni, wajburni, wahdini, warzuqni). 'O Allah! Pardon me, have mercy on me, help me, guide me, and grant me sustenance
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।