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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 277

नंबर 277किताब 2, नंबर 129
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، أَخْبَرَنَا مُعَلَّى بْنُ أَسَدٍ، حَدَّثَنَا وُهَيْبٌ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَجْلاَنَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ عَامِرِ بْنِ سَعْدِ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم أَمَرَ بِوَضْعِ الْيَدَيْنِ وَنَصْبِ الْقَدَمَيْنِ ‏.‏
Amir bin Sa'd [bin Abi Waqqas] narrated from his father:"The Prophet ordered placing the hands (on the ground) keeping the feet erect. (by resting feet on the toes and making the tips of the toes facing the Qiblah)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAhmad Muhammad Shakir
  • HasanAl-Albani

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।