सीधे कंटेंट पर जाएँ
जामे तिर्मिज़ी

नंबर 272

नंबर 272किताब 2, नंबर 124
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا بَكْرُ بْنُ مُضَرَ، عَنِ ابْنِ الْهَادِ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ عَامِرِ بْنِ سَعْدِ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍ، عَنِ الْعَبَّاسِ بْنِ عَبْدِ الْمُطَّلِبِ، أَنَّهُ سَمِعَ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ إِذَا سَجَدَ الْعَبْدُ سَجَدَ مَعَهُ سَبْعَةُ آرَابٍ وَجْهُهُ وَكَفَّاهُ وَرُكْبَتَاهُ وَقَدَمَاهُ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ وَفِي الْبَابِ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ وَأَبِي هُرَيْرَةَ وَجَابِرٍ وَأَبِي سَعِيدٍ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ الْعَبَّاسِ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَعَلَيْهِ الْعَمَلُ عِنْدَ أَهْلِ الْعِلْمِ ‏.‏
Al-Abbas bin Abdul-Muttalib narrated that he heard :Allah's Messenger Saying: "When the worshipper prostrates with him: His face, his hands, his knees, and his feet
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।