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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 271

नंबर 271किताब 2, नंबर 123
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ غِيَاثٍ، عَنِ الْحَجَّاجِ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، قَالَ قُلْتُ لِلْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍ أَيْنَ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يَضَعُ وَجْهَهُ إِذَا سَجَدَ فَقَالَ بَيْنَ كَفَّيْهِ ‏.‏ قَالَ وَفِي الْبَابِ عَنْ وَائِلِ بْنِ حُجْرٍ وَأَبِي حُمَيْدٍ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ الْبَرَاءِ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ غَرِيبٌ ‏.‏ وَهُوَ الَّذِي اخْتَارَهُ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ أَنْ تَكُونَ يَدَاهُ قَرِيبًا مِنْ أُذُنَيْهِ ‏.‏
Abu Ishaq narrated:"I said to Al-Bara bin Azib: 'Where would the Prophet place his face when he prostrated?' He said: 'Between his hands
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • HasanBashar Awad Maarouf
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।