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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 240

नंबर 240किताब 2, नंबर 92
قَالَ وَحَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، أَخْبَرَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ الْمَجِيدِ الْحَنَفِيُّ، حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي ذِئْبٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ سِمْعَانَ، قَالَ سَمِعْتُ أَبَا هُرَيْرَةَ، يَقُولُ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِذَا قَامَ إِلَى الصَّلاَةِ رَفَعَ يَدَيْهِ مَدًّا ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى قَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ وَهَذَا أَصَحُّ مِنْ حَدِيثِ يَحْيَى بْنِ الْيَمَانِ وَحَدِيثُ يَحْيَى بْنِ الْيَمَانِ خَطَأٌ ‏.‏
Abu Hurairah narrated:"When Allah's Messenger would enter the Salat he would raise his hands while they were extended
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।