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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 239

नंबर 239किताब 2, नंबर 91
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، وَأَبُو سَعِيدٍ الأَشَجُّ قَالاَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ الْيَمَانِ، عَنِ ابْنِ أَبِي ذِئْبٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ سَمْعَانَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِذَا كَبَّرَ لِلصَّلاَةِ نَشَرَ أَصَابِعَهُ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ أَبِي هُرَيْرَةَ حَسَنٌ ‏.‏ وَقَدْ رَوَى غَيْرُ وَاحِدٍ هَذَا الْحَدِيثَ عَنِ ابْنِ أَبِي ذِئْبٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ سِمْعَانَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ إِذَا دَخَلَ فِي الصَّلاَةِ رَفَعَ يَدَيْهِ مَدًّا ‏.‏ وَهَذَا أَصَحُّ مِنْ رِوَايَةِ يَحْيَى بْنِ الْيَمَانِ وَأَخْطَأَ يَحْيَى بْنُ الْيَمَانِ فِي هَذَا الْحَدِيثِ ‏.‏
Abu Hurairah narrated:"When Allah's Messenger performed the Takbir for Salat he would spread his fingers
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।