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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 223

नंबर 223किताब 2, नंबर 75
حَدَّثَنَا عَبَّاسٌ الْعَنْبَرِيُّ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ كَثِيرٍ أَبُو غَسَّانَ الْعَنْبَرِيُّ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ الْكَحَّالِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَوْسٍ الْخُزَاعِيِّ، عَنْ بُرَيْدَةَ الأَسْلَمِيِّ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ بَشِّرِ الْمَشَّائِينَ فِي الظُّلَمِ إِلَى الْمَسَاجِدِ بِالنُّورِ التَّامِّ يَوْمَ الْقِيَامَةِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ مَرْفُوعٌ هُوَ صَحِيحٌ مُسْنَدٌ وَمَوْقُوفٌ إِلَى أَصْحَابِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم وَلَمْ يُسْنَدْ إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏.‏
Buraidah Al-Aslami narrated that :the Prophet said: "Give glad tiding to those who walk to the Masajid in the dark; of a complete light on the Day of Resurrection
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।