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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 222

नंबर 222किताब 2, नंबर 74
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ، أَخْبَرَنَا دَاوُدُ بْنُ أَبِي هِنْدٍ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ جُنْدَبِ بْنِ سُفْيَانَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَنْ صَلَّى الصُّبْحَ فَهُوَ فِي ذِمَّةِ اللَّهِ فَلاَ تُخْفِرُوا اللَّهَ فِي ذِمَّتِهِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Jundub bin Sufyan narrated that :the Prophet said: "Whoever prays the Subh then he is under the protection of Allah's covenant, so do not be treacherous with Allah in his covenant
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।