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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 165

नंबर 165किताब 2, नंबर 17
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ أَبِي الشَّوَارِبِ، حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ، عَنْ أَبِي بِشْرٍ، عَنْ بَشِيرِ بْنِ ثَابِتٍ، عَنْ حَبِيبِ بْنِ سَالِمٍ، عَنِ النُّعْمَانِ بْنِ بَشِيرٍ، قَالَ أَنَا أَعْلَمُ النَّاسِ، بِوَقْتِ هَذِهِ الصَّلاَةِ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يُصَلِّيهَا لِسُقُوطِ الْقَمَرِ لِثَالِثَةٍ ‏"‏ ‏.‏
An-Nu'man bin Bashir said:"I am the most knowledgeable among the people about the prescribed time of this prayer: Allah's Messenger would pray it when the moon set on the third (of the month)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।