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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1502

नंबर 1502किताब 19, नंबर 13
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا مَالِكُ بْنُ أَنَسٍ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ نَحَرْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِالْحُدَيْبِيَةِ الْبَدَنَةَ عَنْ سَبْعَةٍ وَالْبَقَرَةَ عَنْ سَبْعَةٍ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏ وَالْعَمَلُ عَلَى هَذَا عِنْدَ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم وَغَيْرِهِمْ وَهُوَ قَوْلُ سُفْيَانَ الثَّوْرِيِّ وَابْنِ الْمُبَارَكِ وَالشَّافِعِيِّ وَأَحْمَدَ وَإِسْحَاقَ ‏.‏ وَقَالَ إِسْحَاقُ يُجْزِئُ أَيْضًا الْبَعِيرُ عَنْ عَشَرَةٍ ‏.‏ وَاحْتَجَّ بِحَدِيثِ ابْنِ عَبَّاسٍ ‏.‏
Narrated Jabir:"We performed the Nahr (sacrifice) with the Messenger of Allah (ﷺ) at Al-Hudaibiyyah: A camel for seven (persons) and a cow for seven (persons)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 19 · The Book on Sacrifices

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।