सीधे कंटेंट पर जाएँ
जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1501

नंबर 1501किताब 19, नंबर 12
حَدَّثَنَا أَبُو عَمَّارٍ الْحُسَيْنُ بْنُ حُرَيْثٍ، حَدَّثَنَا الْفَضْلُ بْنُ مُوسَى، عَنِ الْحُسَيْنِ بْنِ وَاقِدٍ، عَنْ عِلْبَاءَ بْنِ أَحْمَرَ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ كُنَّا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي سَفَرٍ فَحَضَرَ الأَضْحَى فَاشْتَرَكْنَا فِي الْبَقَرَةِ سَبْعَةً وَفِي الْبَعِيرِ عَشَرَةً ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى وَفِي الْبَابِ عَنْ أَبِي الأَسْوَدِ السُّلَمِيِّ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَدِّهِ وَأَبِي أَيُّوبَ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ ابْنِ عَبَّاسٍ حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ لاَ نَعْرِفُهُ إِلاَّ مِنْ حَدِيثِ الْفَضْلِ بْنِ مُوسَى ‏.‏
Narrated Ibn 'Abbas:"We were with the Messenger of Allah (ﷺ) on a journey when the (Day of) Adha came, so we shared seven for a cow and ten for a camel
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • HasanBashar Awad Maarouf
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 19 · The Book on Sacrifices

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।