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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1424

नंबर 1424किताब 17, नंबर 2
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ الأَسْوَدِ أَبُو عَمْرٍو الْبَصْرِيُّ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رَبِيعَةَ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زِيَادٍ الدِّمَشْقِيُّ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ ادْرَءُوا الْحُدُودَ عَنِ الْمُسْلِمِينَ مَا اسْتَطَعْتُمْ فَإِنْ كَانَ لَهُ مَخْرَجٌ فَخَلُّوا سَبِيلَهُ فَإِنَّ الإِمَامَ أَنْ يُخْطِئَ فِي الْعَفْوِ خَيْرٌ مِنْ أَنْ يُخْطِئَ فِي الْعُقُوبَةِ ‏"‏ ‏
Narrated 'Aishah: that the Messenger of Allah (ﷺ): "Avert the legal penalties from the Muslims as much as possible, if he has a way out then leave him to his way, for if the Imam makes a mistake in forgiving it would be better than making mistake in punishment
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • DaifBashar Awad Maarouf

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 17 · The Book on Legal Punishments (Al-Hudud)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।