حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَهْلِ بْنِ عَسْكَرٍ الْبَغْدَادِيُّ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يُوسُفَ، حَدَّثَنَا نَافِعُ بْنُ عُمَرَ الْجُمَحِيُّ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَضَى أَنَّ الْيَمِينَ عَلَى الْمُدَّعَى عَلَيْهِ . قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ . وَالْعَمَلُ عَلَى هَذَا عِنْدَ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم وَغَيْرِهِمْ أَنَّ الْبَيِّنَةَ عَلَى الْمُدَّعِي وَالْيَمِينَ عَلَى الْمُدَّعَى عَلَيْهِ .
Ibn 'Abbas narrated that the Messenger of Allah (ﷺ) judged that the oath is due from the one the claim is made against
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAhmad Muhammad Shakir
SahihAl-Albani
Hasan SahihBashar Awad Maarouf
Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।