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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1137

नंबर 1137किताब 11, नंबर 59
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، وَابْنُ أَبِي عُمَرَ، قَالاَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ، عَنْ عَطَاءٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ كُنَّا نَعْزِلُ وَالْقُرْآنُ يَنْزِلُ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ جَابِرٍ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَقَدْ رُوِيَ عَنْهُ مِنْ غَيْرِ وَجْهٍ ‏.‏ وَقَدْ رَخَّصَ قَوْمٌ مِنْ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم وَغَيْرِهِمْ فِي الْعَزْلِ ‏.‏ وَقَالَ مَالِكُ بْنُ أَنَسٍ تُسْتَأْمَرُ الْحُرَّةُ فِي الْعَزْلِ وَلاَ تُسْتَأْمَرُ الأَمَةُ ‏.‏
Jabir bin Abdullah narrated:"We practiced Azl while the Qur'an was being revealed
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Book on Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।