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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1136

नंबर 1136किताब 11, नंबर 58
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ أَبِي الشَّوَارِبِ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ، حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ، عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ ثَوْبَانَ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ قُلْنَا يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّا كُنَّا نَعْزِلُ فَزَعَمَتِ الْيَهُودُ أَنَّهَا الْمَوْءُودَةُ الصُّغْرَى ‏.‏ فَقَالَ ‏ "‏ كَذَبَتِ الْيَهُودُ إِنَّ اللَّهَ إِذَا أَرَادَ أَنْ يَخْلُقَهُ لَمْ يَمْنَعْهُ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ وَفِي الْبَابِ عَنْ عُمَرَ وَالْبَرَاءِ وَأَبِي هُرَيْرَةَ وَأَبِي سَعِيدٍ ‏.‏
Jabir narrated:"We said: 'O Messenger of Allah! We practice Azl, but the Jews claim that it is minor infanticide.' So he said: 'The Jews lie. When Allah wants to create it, nothing can prevent Him
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Book on Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।