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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 979

नंबर 979किताब 10, नंबर 15
حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ الصَّبَّاحِ الْبَغْدَادِيُّ، حَدَّثَنَا مُبَشِّرُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ الْحَلَبِيُّ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْعَلاَءِ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ مَا أَغْبِطُ أَحَدًا بِهَوْنِ مَوْتٍ بَعْدَ الَّذِي رَأَيْتُ مِنْ شِدَّةِ مَوْتِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ قَالَ سَأَلْتُ أَبَا زُرْعَةَ عَنْ هَذَا الْحَدِيثِ وَقُلْتُ لَهُ مَنْ عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ الْعَلاَءِ فَقَالَ هُوَ ابْنُ الْعَلاَءِ بْنِ اللَّجْلاَجِ ‏.‏ وَإِنَّمَا عَرَّفَهُ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ ‏.‏
Aishah narrated:"I was not envious of anyone whose death was easy after I saw the severity the death of the Messenger of Allah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • HasanBashar Awad Maarouf
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 10 · The Book on Jana''iz (Funerals)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।