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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1013

नंबर 1013किताब 10, नंबर 49
حَدَّثَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلاَنَ، حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ سِمَاكِ بْنِ حَرْبٍ، قَالَ سَمِعْتُ جَابِرَ بْنَ سَمُرَةَ، يَقُولُ كُنَّا مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فِي جَنَازَةِ أَبِي الدَّحْدَاحِ وَهُوَ عَلَى فَرَسٍ لَهُ يَسْعَى وَنَحْنُ حَوْلَهُ وَهُوَ يَتَوَقَّصُ بِهِ ‏.‏
Jabir bin Samurah narrated:"We were with the Prophet (following) the funeral of Ibn Ad-Dahbah, and he was on a horse that was walking quickly, and we were around him, and he was trotting
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 10 · The Book on Jana''iz (Funerals)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।