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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 119

नंबर 119किताब 1, नंबर 119
حَدَّثَنَا هَنَّادٌ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، نَحْوَهُ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى وَهَذَا قَوْلُ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ وَغَيْرِهِ ‏.‏ وَقَدْ رَوَى غَيْرُ، وَاحِدٍ، عَنِ الأَسْوَدِ، عَنْ عَائِشَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ كَانَ يَتَوَضَّأُ قَبْلَ أَنْ يَنَامَ ‏.‏ وَهَذَا أَصَحُّ مِنْ حَدِيثِ أَبِي إِسْحَاقَ عَنِ الأَسْوَدِ ‏.‏ وَقَدْ رَوَى عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ هَذَا الْحَدِيثَ شُعْبَةُ وَالثَّوْرِيُّ وَغَيْرُ وَاحِدٍ ‏.‏ وَيَرَوْنَ أَنَّ هَذَا غَلَطٌ مِنْ أَبِي إِسْحَاقَ ‏.‏
Abu Ishaq:There is a similar report (as no. 1I8) narrated via Abu Ishaq
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book on Purification

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।