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सुनन नसाई

नंबर 776

नंबर 776किताब 9, नंबर 35
أَخْبَرَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ، وَشُعَيْبُ بْنُ يُوسُفَ، عَنْ يَحْيَى، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي مُحَمَّدُ بْنُ عَبَّادٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ سُفْيَانَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ السَّائِبِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم صَلَّى يَوْمَ الْفَتْحِ فَوَضَعَ نَعْلَيْهِ عَنْ يَسَارِهِ ‏.‏
It was narrated from Abdullah bin As Saib that the Messenger of Allah(ﷺ) prayed on the day of Conquest (of Makkah), and he put his sandals to his left
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · The Book of the Qiblah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।