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सुनन नसाई

नंबर 652

नंबर 652किताब 7, नंबर 27
أَخْبَرَنَا سُوَيْدٌ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ، عَنْ يُونُسَ بْنِ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ مُحَارِبِ بْنِ دِثَارٍ، قَالَ حَدَّثَنِي الأَسْوَدُ بْنُ يَزِيدَ، عَنْ أَبِي مَحْذُورَةَ، أَنَّ آخِرَ الأَذَانِ، لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ ‏.‏
It was narrated that Muharib bin Dithar said:"Al-Aswad bin Yazid narrated to me from Abu Mahdhurah that the final words of the Adhan are: 'La ilaha illahha (there is none worthy of worship except Allah)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih IsnaadAbu Ghuddah
  • Sahih IsnaadAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · The Book of the Adhan (The Call to Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।