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सुनन नसाई

नंबर 649

नंबर 649किताब 7, नंबर 24
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَعْدَانَ بْنِ عِيسَى، قَالَ حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ أَعْيَنَ، قَالَ حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ، قَالَ حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنِ الأَسْوَدِ، عَنْ بِلاَلٍ، قَالَ آخِرُ الأَذَانِ اللَّهُ أَكْبَرُ اللَّهُ أَكْبَرُ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ ‏.‏
It was narrated from Al-Aswad that Bilal said:"The final words of the Adhan are: 'Allahu Akbar, Allahu Akbar; La ilaha illallah (Allah is the Greatest, Allah is the Greatest, there is none worthy of worship except Allah)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih IsnaadAbu Ghuddah
  • Sahih IsnaadAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · The Book of the Adhan (The Call to Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।