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सुनन नसाई

नंबर 617

नंबर 617किताब 6, नंबर 124
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ ثَابِتٍ الْبُنَانِيِّ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ رَبَاحٍ، عَنْ أَبِي قَتَادَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم لَمَّا نَامُوا عَنِ الصَّلاَةِ حَتَّى طَلَعَتِ الشَّمْسُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ فَلْيُصَلِّهَا أَحَدُكُمْ مِنَ الْغَدِ لِوَقْتِهَا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Qatadah that when they missed the prayer because they slept until the sun rose, the Messenger of Allah (ﷺ) said:"Let any one of you pray it during its time tomorrow
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of the Times (of Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।