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सुनन नसाई

नंबर 577

नंबर 577किताब 6, नंबर 84
أَخْبَرَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ، قَالَ أَنْبَأَنَا عَلِيُّ بْنُ مُسْهِرٍ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الأَسْوَدِ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ صَلاَتَانِ مَا تَرَكَهُمَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي بَيْتِي سِرًّا وَلاَ عَلاَنِيَةً رَكْعَتَانِ قَبْلَ الْفَجْرِ وَرَكْعَتَانِ بَعْدَ الْعَصْرِ ‏.‏
It was narrated that 'Aishah said:"There are two prayers that the Messenger of Allah (ﷺ) never neglected to pray them in my house secretly nor publicly: Two Rak'ahs before Fajr and two Rak'ahs after 'Asr
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of the Times (of Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।