सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 576

नंबर 576किताब 6, नंबर 83
أَخْبَرَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ مَسْعُودٍ، عَنْ خَالِدِ بْنِ الْحَارِثِ، عَنْ شُعْبَةَ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، قَالَ سَمِعْتُ مَسْرُوقًا، وَالأَسْوَدَ، قَالاَ نَشْهَدُ عَلَى عَائِشَةَ أَنَّهَا قَالَتْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِذَا كَانَ عِنْدِي بَعْدَ الْعَصْرِ صَلاَّهُمَا ‏.‏
It was narrated that Abu Ishaq said:"I heard Masruq and Al-Aswad say: We bear witness that 'Aishah said: 'When the Messenger of Allah (ﷺ) was with me after 'Asr, he would pray them (these two Rak'ahs)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of the Times (of Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।