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सुनन नसाई

नंबर 567

नंबर 567किताब 6, नंबर 74
حَدَّثَنَا عَبْدُ الْحَمِيدِ بْنُ مُحَمَّدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا مَخْلَدٌ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَزِيدَ، أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا سَعِيدٍ الْخُدْرِيَّ، يَقُولُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ لاَ صَلاَةَ بَعْدَ الْفَجْرِ حَتَّى تَبْزُغَ الشَّمْسُ وَلاَ صَلاَةَ بَعْدَ الْعَصْرِ حَتَّى تَغْرُبَ الشَّمْسُ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from 'Ata' bin Yazid that he heard Abu Sa'eed Al-Khudri say:"I heard the Messenger of Allah (ﷺ) say: 'There is no prayer after Fajr until the sun has clearly risen, and no prayer after 'Asr until the sun has fully set
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of the Times (of Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।