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सुनन नसाई

नंबर 558

नंबर 558किताब 6, नंबर 65
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ التِّرْمِذِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا أَيُّوبُ بْنُ سُلَيْمَانَ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ، عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ بِلاَلٍ، عَنْ يُونُسَ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ سَالِمٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَنْ أَدْرَكَ رَكْعَةً مِنْ صَلاَةٍ مِنَ الصَّلَوَاتِ فَقَدْ أَدْرَكَهَا إِلاَّ أَنَّهُ يَقْضِي مَا فَاتَهُ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Salim that the Messenger of Allah (ﷺ) said:"Whoever catches up with a Rak'ah of one of the prayers has caught up with it, except that he has to make up the portion that he missed
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih LighairihiAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of the Times (of Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।