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सुनन नसाई

नंबर 549

नंबर 549किताब 6, नंबर 56
أَخْبَرَنِي إِبْرَاهِيمُ بْنُ يَعْقُوبَ، قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي مَرْيَمَ، قَالَ أَخْبَرَنَا أَبُو غَسَّانَ، قَالَ حَدَّثَنِي زَيْدُ بْنُ أَسْلَمَ، عَنْ عَاصِمِ بْنِ عُمَرَ بْنِ قَتَادَةَ، عَنْ مَحْمُودِ بْنِ لَبِيدٍ، عَنْ رِجَالٍ، مِنْ قَوْمِهِ مِنَ الأَنْصَارِ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَا أَسْفَرْتُمْ بِالْفَجْرِ فَإِنَّهُ أَعْظَمُ بِالأَجْرِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Mahmud bin Labid, from some men among his people who were of the Ansar, that the Messenger of Allah (ﷺ) said:"The more you delay Fajr, the greater the reward
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih IsnaadAbu Ghuddah
  • Sahih IsnaadAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of the Times (of Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।