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सुनन नसाई

नंबर 497

नंबर 497किताब 6, नंबर 4
أَخْبَرَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ حَدَّثَنَا حُمَيْدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، قَالَ حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ وَهْبٍ، عَنْ خَبَّابٍ، قَالَ شَكَوْنَا إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم حَرَّ الرَّمْضَاءِ فَلَمْ يُشْكِنَا ‏.‏ قِيلَ لأَبِي إِسْحَاقَ فِي تَعْجِيلِهَا قَالَ نَعَمْ ‏.‏
It was narrated that Khabbab said:"We complained to the Messenger of Alalh (ﷺ) about how hot the sand was, but he did not respond to our complaint." It was said to Abu Ishaq (one of the narrators): "Did they complain regarding his praying it early?" He said: "Yes
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of the Times (of Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।