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सुनन नसाई

नंबर 5462

नंबर 5462किताब 50, नंबर 35
أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ نَصْرٍ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الصَّمَدِ بْنُ عَبْدِ الْوَارِثِ، قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ إِسْحَاقَ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ يَسَارٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَقُولُ ‏ "‏ اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْقِلَّةِ وَالْفَقْرِ وَالذِّلَّةِ وَأَعُوذُ بِكَ أَنْ أَظْلِمَ أَوْ أُظْلَمَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Hurairah,:From the Prophet [SAW], that he used to say: "Allahumma inni a'udhu bika minal-qillati wal-faqri, wadh-dhillati wa a'udhu bika min azlima aw uzlam (O Allah, I seek refuge with You from want, poverty and humiliation, and I seek refuge with You from wronging others or being wronged)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 50 · The Book of Seeking Refuge with Allah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।