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सुनन नसाई

नंबर 5461

नंबर 5461किताब 50, नंबर 34
قَالَ أَخْبَرَنِي مَحْمُودُ بْنُ خَالِدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ، عَنْ أَبِي عَمْرٍو، - وَهُوَ الأَوْزَاعِيُّ - قَالَ حَدَّثَنِي إِسْحَاقُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ، قَالَ حَدَّثَنِي جَعْفَرُ بْنُ عِيَاضٍ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ تَعَوَّذُوا بِاللَّهِ مِنَ الْفَقْرِ وَالْقِلَّةِ وَالذِّلَّةِ وَأَنْ تَظْلِمَ أَوْ تُظْلَمَ ‏"‏ ‏.‏
Abu Hurairah said:"The Messenger of Allah [SAW] said: 'Seek refuge with Allah from poverty, want, humiliation and wronging others or being wronged
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAbu Ghuddah
  • DaifAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 50 · The Book of Seeking Refuge with Allah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।