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सुनन नसाई

नंबर 456

नंबर 456किताब 5, नंबर 9
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى، وَعَبْدُ الرَّحْمَنِ، قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ، عَنْ بُكَيْرِ بْنِ الأَخْنَسِ، عَنْ مُجَاهِدٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ فُرِضَتِ الصَّلاَةُ عَلَى لِسَانِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فِي الْحَضَرِ أَرْبَعًا وَفِي السَّفَرِ رَكْعَتَيْنِ وَفِي الْخَوْفِ رَكْعَةً ‏.‏
It was narrated that Ibn 'Abbas said:"The Salah was enjoined on the lips of the Prophet (ﷺ), four Rak'ahs while resident, and two while traveling, and one Rak'ah during times of fear
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Salah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।