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सुनन नसाई

नंबर 4995

नंबर 4995किताब 47, नंबर 11
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ، عَنِ ابْنِ عَجْلاَنَ، عَنِ الْقَعْقَاعِ بْنِ حَكِيمٍ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ الْمُسْلِمُ مَنْ سَلِمَ النَّاسُ مِنْ لِسَانِهِ وَيَدِهِ وَالْمُؤْمِنُ مَنْ أَمِنَهُ النَّاسُ عَلَى دِمَائِهِمْ وَأَمْوَالِهِمْ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Hurairah that:The Messenger of Allah [SAW] said: "The Muslim is the one from whose tongue and hand the people are safe, and the believer is the one from whom the people's lives and wealth are safe
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihAbu Ghuddah
  • Hasan SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 47 · The Book Of Faith and its Signs

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।