सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 4935

नंबर 4935किताब 46, नंबर 66
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ سَعْدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ بْنِ سَعْدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا عَمِّي، قَالَ حَدَّثَنَا أَبِي، عَنِ ابْنِ إِسْحَاقَ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي حَبِيبٍ، أَنَّ بُكَيْرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الأَشَجِّ، حَدَّثَهُ أَنَّ سُلَيْمَانَ بْنَ يَسَارٍ حَدَّثَهُ أَنَّ عَمْرَةَ ابْنَةَ عَبْدِ الرَّحْمَنِ حَدَّثَتْهُ أَنَّهَا، سَمِعَتْ عَائِشَةَ، تَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لاَ تُقْطَعُ يَدُ السَّارِقِ فِيمَا دُونَ الْمِجَنِّ ‏"‏ ‏.‏ قِيلَ لِعَائِشَةَ مَا ثَمَنُ الْمِجَنِّ قَالَتْ رُبُعُ دِينَارٍ ‏.‏
Aishah said:The Messenger of Allah said: 'The hand of the thief is not to be cut off for anything less than a shield."' It was said to 'Aishah: 'What is the price of a shield?" She said: "One-quarter of a Dinar
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih LighairihiAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 46 · The Book of Cutting off the Hand of the Thief

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।