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सुनन नसाई

नंबर 4851

नंबर 4851किताब 45, नंबर 146
أَخْبَرَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْهَيْثَمِ، قَالَ حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ، قَالَ حَدَّثَنَا هَمَّامٌ، قَالَ حَدَّثَنَا حُسَيْنٌ الْمُعَلِّمُ، وَابْنُ، جُرَيْجٍ عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَدِّهِ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ فِي خُطْبَتِهِ وَهُوَ مُسْنِدٌ ظَهْرَهُ إِلَى الْكَعْبَةِ ‏ "‏ الأَصَابِعُ سَوَاءٌ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from 'Amr bin Shu'aib, from his father, from his grandfather, that the Messenger of Allah (ﷺ) said in his khutbah, while he was leaning with his back against the Ka'bah:"The fingers are the same
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihAbu Ghuddah
  • Hasan SahihAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 45 · The Book of Oaths (qasamah), Retaliation and Blood Money

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।