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सुनन नसाई

नंबर 4829

नंबर 4829किताब 45, नंबर 124
أَخْبَرَنَا الْعَبَّاسُ بْنُ عَبْدِ الْعَظِيمِ، قَالَ حَدَّثَنَا الضَّحَّاكُ بْنُ مَخْلَدٍ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي أَبُو الزُّبَيْرِ، أَنَّهُ سَمِعَ جَابِرًا، يَقُولُ كَتَبَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَلَى كُلِّ بَطْنٍ عُقُولَةً وَلاَ يَحِلُّ لِمَوْلًى أَنْ يَتَوَلَّى مُسْلِمًا بِغَيْرِ إِذْنِهِ ‏.‏
Jabir said:"The Messenger of Allah ruled that every clan should take part in paying the blood money, and it is not permissible for a freed slave to take a Muslim (other than the one who freed him) as his Mawla (Patron) without the permission (of his former master who set him free)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 45 · The Book of Oaths (qasamah), Retaliation and Blood Money

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।