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सुनन नसाई

नंबर 4699

नंबर 4699किताब 44, नंबर 251
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، قَالَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ، - وَهُوَ ابْنُ زُرَيْعٍ - قَالَ حَدَّثَنَا أَيُّوبُ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ أَعْتَقَ شِرْكًا لَهُ فِي مَمْلُوكٍ وَكَانَ لَهُ مِنَ الْمَالِ مَا يَبْلُغُ ثَمَنَهُ بِقِيمَةِ الْعَبْدِ فَهُوَ عَتِيقٌ مِنْ مَالِهِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Ibn 'Umar said:"The Messenger of Allah said: 'Whoever sets free his share of a slave, and he has sufficient wealth to set him free completely by paying the price of the slave, then he should set him free with his own wealth
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of Financial Transactions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।