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सुनन नसाई

नंबर 4698

नंबर 4698किताब 44, नंबर 250
أَخْبَرَنَا نُوحُ بْنُ حَبِيبٍ، قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، قَالَ أَنْبَأَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ سَالِمٍ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَنْ أَعْتَقَ شِرْكًا لَهُ فِي عَبْدٍ أُتِمَّ مَا بَقِيَ فِي مَالِهِ إِنْ كَانَ لَهُ مَالٌ يَبْلُغُ ثَمَنَ الْعَبْدِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Salim, from his father, that the Messenger of Allah said:"Whoever sets free his share of a slave should set him free completely from his own wealth, if he has enough wealth to cover the price of the slave
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of Financial Transactions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।