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सुनन नसाई

नंबर 4586

नंबर 4586किताब 44, नंबर 138
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ أَبِي الْهُذَيْلِ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، فِي قَبْضِ الدَّنَانِيرِ مِنَ الدَّرَاهِمِ أَنَّهُ كَانَ يَكْرَهُهَا إِذَا كَانَ مِنْ قَرْضٍ ‏.‏
It was narrated from Ibrahim, with regard to exchanging Dirnars for Dirhams, that:he disliked it (this transaction) if it was done on credit. (Da 'if)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih MaqtuAbu Ghuddah
  • Sahih MaqtuAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of Financial Transactions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।