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सुनन नसाई

नंबर 4585

नंबर 4585किताब 44, नंबर 137
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، قَالَ أَنْبَأَنَا مُؤَمَّلٌ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ أَبِي هَاشِمٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّهُ كَانَ لاَ يَرَى بَأْسًا - يَعْنِي - فِي قَبْضِ الدَّرَاهِمِ مِنَ الدَّنَانِيرِ وَالدَّنَانِيرِ مِنَ الدَّرَاهِمِ ‏.‏
It was narrated from Saeed bin Jubair, from Ibn 'Umar, that:he did not see anything wrong with parying Dirhams for Dinars
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih MuqufAbu Ghuddah
  • Sahih MuqufAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of Financial Transactions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।