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सुनन नसाई

नंबर 4555

नंबर 4555किताब 44, नंबर 107
حَدَّثَنِي إِسْمَاعِيلُ بْنُ مَسْعُودٍ، قَالَ حَدَّثَنَا خَالِدٌ، قَالَ حَدَّثَنَا هِشَامٌ، عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ الْخُدْرِيُّ، قَالَ كُنَّا نُرْزَقُ تَمْرَ الْجَمْعِ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَنَبِيعُ الصَّاعَيْنِ بِالصَّاعِ فَبَلَغَ ذَلِكَ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ ‏ "‏ لاَ صَاعَىْ تَمْرٍ بِصَاعٍ وَلاَ صَاعَىْ حِنْطَةٍ بِصَاعٍ وَلاَ دِرْهَمًا بِدِرْهَمَيْنِ ‏"‏ ‏.‏
(A Abu Sa 'eed al- Khudri said:"We used to be given mixed dates during the time of the Messenger of Allah and we would sell two Sa s for one Sa News of that reached the Messenger of Allah and he said Do not sell) two Sa s of dates for a Sa, or two Sa s of wheat for s Sa or a Dirham for two Dirhams
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • Sahih HadithAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of Financial Transactions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।