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सुनन नसाई

नंबर 4496

नंबर 4496किताब 44, नंबर 48
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ، عَنْ مَالِكٍ، عَنْ أَبِي الزِّنَادِ، عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ تَلَقُّوا الرُّكْبَانَ لِلْبَيْعِ وَلاَ يَبِعْ بَعْضُكُمْ عَلَى بَيْعِ بَعْضٍ - وَلاَ تَنَاجَشُوا - وَلاَ يَبِيعُ حَاضِرٌ لِبَادٍ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Hurairah that the Messenger of Allah said:"Do not go out to meet the riders, and do not urge someone to cancel a sale he has already agreed upon os as to sell him your own goods, do not artificially inflate prices, and let not a town-dweller sell for a desert-dweller." (Sahih)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • Sahih HadithAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of Financial Transactions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।