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सुनन नसाई

नंबर 4393

नंबर 4393किताब 43, नंबर 33
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، عَنْ يَحْيَى، عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ، عَنْ عَطَاءٍ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ كُنَّا نَتَمَتَّعُ مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَنَذْبَحُ الْبَقَرَةَ عَنْ سَبْعَةٍ وَنَشْتَرِكُ فِيهَا ‏.‏
It was narrated that Jabir said:"We would make Tamattu' when the Prophet was with us, and we would sacrifice a cow on behalf of seven people, sharing it among ourselves." (Sahih)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of ad-Dahaya (Sacrifices)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।