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सुनन नसाई

नंबर 4392

नंबर 4392किताब 43, नंबर 32
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ غَزْوَانَ، قَالَ حَدَّثَنَا الْفَضْلُ بْنُ مُوسَى، عَنْ حُسَيْنٍ، - يَعْنِي ابْنَ وَاقِدٍ - عَنْ عِلْبَاءَ بْنِ أَحْمَرَ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ كُنَّا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي سَفَرٍ فَحَضَرَ النَّحْرُ فَاشْتَرَكْنَا فِي الْبَعِيرِ عَنْ عَشْرَةٍ وَالْبَقَرَةِ عَنْ سَبْعَةٍ ‏.‏
It was narrated that Ibn 'Abbas said:"We were with the Mesenger of Allah on a journey, when the Day of Sacrifice came, so we shared a camel among ten men, and a cow among seven
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of ad-Dahaya (Sacrifices)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।