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सुनन नसाई

नंबर 4388

नंबर 4388किताब 43, नंबर 28
أَخْبَرَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ مَسْعُودٍ، قَالَ حَدَّثَنَا حَاتِمُ بْنُ وَرْدَانَ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سِيرِينَ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ خَطَبَنَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَوْمَ أَضْحَى وَانْكَفَأَ إِلَى كَبْشَيْنِ أَمْلَحَيْنِ فَذَبَحَهُمَا ‏.‏ مُخْتَصَرٌ ‏.‏
It was narrated that Anas bin Malik said:"The Messenge of Allah addressed us on the Day of Sacrifice, and he went toward two Amlah rams and sacrificed them." An abridgment. (Sahih)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of ad-Dahaya (Sacrifices)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।