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सुनन नसाई

नंबर 4378

नंबर 4378किताब 43, नंबर 18
أَخْبَرَنَا أَبُو دَاوُدَ، سُلَيْمَانُ بْنُ سَيْفٍ قَالَ حَدَّثَنَا الْحَسَنُ، - وَهُوَ ابْنُ أَعْيَنَ - وَأَبُو جَعْفَرٍ - يَعْنِي النُّفَيْلِيَّ - قَالاَ حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لاَ تَذْبَحُوا إِلاَّ مُسِنَّةً إِلاَّ أَنْ يَعْسُرَ عَلَيْكُمْ فَتَذْبَحُوا جَذَعَةً مِنَ الضَّأْنِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Jabir said:"The Messenger of Allah said: 'Do not slaughter anything but a Musinnah, unless that is difficult, in which case you can slaughter a Jadh'ah sheep
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAbu Ghuddah
  • DaifAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of ad-Dahaya (Sacrifices)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।