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सुनन नसाई

नंबर 4377

नंबर 4377किताब 43, नंबर 17
أَخْبَرَنَا حُمَيْدُ بْنُ مَسْعَدَةَ، عَنْ سُفْيَانَ، - وَهُوَ ابْنُ حَبِيبٍ - عَنْ شُعْبَةَ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ جُرَىِّ بْنِ كُلَيْبٍ، قَالَ سَمِعْتُ عَلِيًّا، يَقُولُ نَهَى رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنْ يُضَحَّى بِأَعْضَبِ الْقَرْنِ ‏.‏ فَذَكَرْتُ ذَلِكَ لِسَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ قَالَ نَعَمْ إِلاَّ عَضَبَ النِّصْفِ وَأَكْثَرَ مِنْ ذَلِكَ ‏.‏
Ali said:"Messenger of Allah forbade us from sacrificing an animal with a broken horn." I (the narrator) mentioned that to Sa'eed bin Al_Musayyab and he said: "Yes, m unless half or more of the horn is missing
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAbu Ghuddah
  • DaifAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of ad-Dahaya (Sacrifices)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।