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सुनन नसाई

नंबर 4349

नंबर 4349किताब 42, नंबर 87
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ يَزِيدَ الْمُقْرِئُ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَمْرٍو، عَنْ صُهَيْبٍ، مَوْلَى ابْنِ عَامِرٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ مَا مِنْ إِنْسَانٍ قَتَلَ عُصْفُورًا فَمَا فَوْقَهَا بِغَيْرِ حَقِّهَا إِلاَّ سَأَلَهُ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ عَنْهَا ‏"‏ ‏.‏ قِيلَ يَا رَسُولَ اللَّهِ وَمَا حَقُّهَا قَالَ ‏"‏ يَذْبَحُهَا فَيَأْكُلُهَا وَلاَ يَقْطَعُ رَأْسَهَا يَرْمِي بِهَا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from 'Abdullah bin 'Amr that the Messenger of Allah said:"There is no person who kills a small bird or anything larger for no just reason, but Allah, the Mighty and Sublime, will ask him about it." It was said: "O Messenger of Allah, what does just reason;' mean?" Her said: "That you slaughter it and eat it, and do not cut off its head and throw it aside
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAbu Ghuddah
  • DaifAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 42 · The Book of Hunting and Slaughtering

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।