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सुनन नसाई

नंबर 4238

नंबर 4238किताब 41, नंबर 17
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَنْصُورٍ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ عَمْرٍو، عَنْ عَطَاءٍ، قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ عَبَّاسٍ، قَالَ مَرَّ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم بِشَاةٍ لِمَيْمُونَةَ مَيِّتَةٍ فَقَالَ ‏ "‏ أَلاَّ أَخَذْتُمْ إِهَابَهَا فَدَبَغْتُمْ فَانْتَفَعْتُمْ ‏"‏ ‏.‏
Ibn 'Abbas said:"The Prophet passed by a sheep belonging to Maimunah that had died and said: 'Why don't you take its skin and tan it and make use of it'?
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 41 · The Book of al-Fara' and al-'Atirah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।