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सुनन नसाई

नंबर 4237

नंबर 4237किताब 41, नंबर 16
أَخْبَرَنِي عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ خَالِدٍ الْقَطَّانُ الرَّقِّيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ، قَالَ قَالَ ابْنُ جُرَيْجٍ أَخْبَرَنِي عَمْرُو بْنُ دِينَارٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي عَطَاءٌ، مُنْذُ حِينٍ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَخْبَرَتْنِي مَيْمُونَةُ، أَنَّ شَاةً، مَاتَتْ فَقَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أَلاَّ دَفَعْتُمْ إِهَابَهَا فَاسْتَمْتَعْتُمْ بِهِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Ibn 'Abbas:"Maimunah told me that a sheep died, and the Prophet said: 'Why don't you tan its skin and make use of it'?
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 41 · The Book of al-Fara' and al-'Atirah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।