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सुनन नसाई

नंबर 4189

नंबर 4189किताब 39, नंबर 41
أَخْبَرَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ، قَالَ حَدَّثَنَا سَيَّارٌ، عَنِ الشَّعْبِيِّ، عَنْ جَرِيرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ بَايَعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم عَلَى السَّمْعِ وَالطَّاعَةِ فَلَقَّنَنِي ‏ "‏ فِيمَا اسْتَطَعْتَ وَالنُّصْحِ لِكُلِّ مُسْلِمٍ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Jarir bin 'Abdullah said:"I gave my pledge to the Prophet to hear and obey, and he told me to add the words.' In as much as you can, and to be since toward every Muslim"'. (Sahih)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 39 · The Book of al-Bay'ah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।